प्रकृति तीन गुणों से बनी है रजस, तमस और सत्व ।
रजस है गति देने वाला गुण यानि संरचनात्मक या सकारात्मक ,
तमस है रोकने वाला यानि स्थिर करने वाला इसे नकारात्मक या संहारक भी कह सकते है। सत्व गुण होता है बैलेंस बनाने वाला यानि रजस और तमस मे balancing act की तरह काम करता है। ब्रह्मा विष्णू और महेश भी ये ही तीन रूप है ब्रहमा जी रचनात्मक, महेश जी संहारक और विष्णू जी दोनो का बैलेंस बनाकर प्रक्रती को चलाने वाले। पदार्थ की सबसे छोटी संरचना होती है परमाणु । परमाणु के भी विज्ञान ने तीन हिस्से बताये इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्युट्रोन। इन तीनों के गुण धर्म भी वे ही है जो श्री कृष्ण जी ने बतलाये थे रजस तमस और सत्व। अब समझते है कि ये तीनों कैसे काम करते है। जिस व्यक्ति के अंदर रजस गुण हावी रहता है वह सकारात्मक सोच का होता है प्रेम से भरा होता है और स्वर्ग की ओर अग्रसर रहता है। जिस व्यक्ति पर तमस गुण हावी रहता है वह नकारत्मक सोच का व्यक्ति होता है गुस्से से भरा होता है और नरक की तरफ अग्रसर रहता है। जिस व्यक्ति मे सत्व गुण हावी होता है उसमे विवेक शक्ति ज्यादा होती है और वह प्रेम व क्रोध से उपर उठकर मोक्ष यानि मुक्ति की ओर अग्रसर होता है। क्रोध को एक लेवल तक हम लेकर आते है और फिर वो हमारी नियन्त्रण क्षमता से बाहर हो जाता है और हम कहते है कि ये गलत काम हमसे किसने करवा दिया। दोष हम फिर भी किसी दूसरे के सर ही मढऩे की कोशिश करते है। बीज हम ही बोते है और जब कड्वे फल या काँटे लगते है तो दोष वृक्ष को देते है । बीज हम ही बोते है हाँ प्रकृति उसे फलने फूलने में जरुर उसकी मदद करती है वो मदद अच्छा हो या बुरा सबकी एक समान करती है। व्यक्ति अच्छे या बुरे का जिम्मेवार स्वयं है लेकिन ये मानने को कभी तैयार नहीं होता। जिस दिन मानने को तैयार हो जायेगा उस दिन से उसका विवेक भी जागना शुरु हो जायेगा और balancing act भी शुरु हो जायेगा।
सुशील ढाका